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Tuesday, January 27, 2026

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*प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ७४ वसंत पूर्ण होने पर समर्पित एक सत्य कथा* *समर्पण संघर्ष सेवा का कठिन कंटक पथ।* -पण्डित मुस्तफा आरिफ

संघर्ष पथ पर अथक निरंतर,
आसान नहीं जीवन चलना।।
कंटक पथ से कंटक चुनकर,
सुगंधित पुष्पो को महकाना।।

जब नरेंद्र मोदी जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक थे। नानाजी देशमुख उनके विभाग प्रमुख थे। एक दिन नानाजी की नज़रे मोदी जी के पैर पर पड़ी। मोदी जी नंगे पांव थे पैरो में सैंडल नहीं थी। नानाजी ने उन्हें सैंडल ख़रीदने के लिए 2 रुपये दिए।

दो महीने बाद नानाजी की मुलाकात फिर मोदी जी से हुई, मोदी जी तब भी नंगे पैर थे। नानाजी आश्चर्यचकित थे, उन्होने पूछा आपने आज सैंडल फिर नहीं पहनी है।

मोदी जी ने हंसते हुए जवाब दिए पैरो की सुधी लेने से ज्यादा महत्वपूर्ण पेट पूजा थी। खुले पैर तो फिर भी रहा जा सकता है, लेकिन खाली पेट नही रहा जा सकता। मेंने दो दिन से खाना नहीं खाया था, तो उन पैसो से मेंने भोजन खरीद लिया।

कल्पना कीजिए की संघ और भाजपा को आज के स्तर तक लेने में संघ और जनसंघ के समर्पित स्वयंसेवको कार्यकर्ता का कितना और किस क़दर बलिदान है।
संघ शक्ति युगे युगे। की राह पर चलना दुरूह है, आसान नहीं है।

इस समर्पण और परिश्रम का आंकलन आज की वेश-भूषा हावभाव और अभिव्यक्ती की शैली से करना सतही मुल्यांकन है। गहरे पानी पैठ से ही समंदर की गहराई नापना मुमकिन है। धरातल के अनुभव ने मोदी जी को एक दृढ़ आत्मविश्वास से जोड़ा है।

उनका जीवन एक सतत अनुष्ठान है, जिसके बगैर उनके अंतस के मर्म को जानना कठिन है। हमें गर्व है देश के इस महान बौद्धिक सम्पदा के धनी पर। सहस्र सलाम कोटी कोटी नमन। आज जीवन के 74 बसंत पूर्ण करने पर संपूर्ण भारतवर्ष की ओर से हार्दिक बधाई अभिनंदन मंगलकामनाए।

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