



ुंबई। जुहु स्थित इस्कॉन मंदिर परिसर के ऑडिटोरियम में हिंदी दिवस पर विश्व हिन्दी अकादमी द्वारा आयोजित समारोह का शुभारंभ लेखक पत्रकार पंडित मुस्तफा आरिफ सहित अनेक सम्मानित हस्तियो ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्हें ३०वें हिंदी सेवा सम्मान से नवाज़ा गया। समारोह में फिल्म निर्देशक राज़ शांडिल्य, फिल्म पंचायत के निर्माता लेखक चंदन कुमार और निर्माता निर्देशक राजन शाही का विश्व अकादमी सम्मान से अभिनंदन किया गया।
आयोजन के सूत्रधार केशव राय ने इस सम्मान समारोह के निरंतर आयोजन पर देश की अनेको प्रसिद्ध हस्तियों के अभिनंदन की जानकारी दी और संचालन किया। वरिष्ठ पत्रकार सुरेश शर्मा ने समारोह की रूपरेखा रखते हुए अतिथियो का स्वागत किया।
अपने उद्बोधन में पंडित मुस्तफा आरिफ ने कहा कि जब तक हम हिंदी को भारत के घर घर में बोली जाने वाली मातृभाषा के रूप में स्वीकार नहीं करते तब तक राष्ट्र भाषा की अवधारणा कोरी कल्पना ही है। मातृ भाषा राष्ट्र भाषा की पहली सीढ़ी है।
इस अवसर प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक अजीत राय ने हिंदी नाट्य परंपरा के भारतेन्दु से लेकर अब तक के विकास का विस्तृत एतिहासिक विमर्श किया। अपराधिक कथाकार श्री विवेक अग्रवाल, फिल्म निर्देशक सुनील तिवारी, तथा समीक्षक स्वरात्मा मिश्रा सहित अनेक विद्वानो और लेखको ने हिंदी के बढ़ते महत्व और उपयोगिता पर चर्चा की।
इस अवसर पर हिंदी को समर्पित एक लघु फिल्म ‘एक दिन क्यूं” का प्रदर्शन किया गया। इस फिल्म का निर्देशन केशव राय और राजेश राठी ने संयुक्त रूप से किया है। इस अवसर पर एक कवि सम्मेलन को सुप्रसिद्ध शायरा लता हयात आदि ने अपने कलामो से नवाज़ा। प्रसिद्ध कॉमेडियन सुनिल पाल ने अपनी प्रस्तुति से दर्शको का मनोरंजन किया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 25 सप्ताह पूर्ण कर रेकार्ड बनानी वाली फिल्म ‘अमीना’ के कलाकारो का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम में यूट्यूब, सोशल मिडिया और रील के दुष्प्रभाव पर केंद्रित नाट्य मंचन भी किया गया।


